October 25, 2020
सुशांत सिंह राजपूत केस- क्या सियासत की भेंट चढ जाएगी सच की जंग?

सुशांत सिंह राजपूत केस- क्या सियासत की भेंट चढ जाएगी सच की जंग?

14 जून, 2020,मुम्बई। अचानक न्यूज की सुर्खियां बदल जाती हैं। कोरोना की जंग के बीच एक दिल-दहलानें वाली ख़बर। आम जनता के लिए ये बस एक ख़बर थी। पर  मुम्बईं सें चलकर इस आग नें बिहाऱ में परिवार जला दिया।

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत  की रहस्यमय मृत्यु मुम्बई पुलिस का दावा आत्महत्या । अवसाद( depression) जैसी बीमारी का नाम आत्महत्या के कारण मानें गए ।

एक सफ़ल अभिनेता, लक्ष्मीं से संमपन्न, एक खुबसुरत संगीनी, ज़िन्दगी मानों कोई हसीऩ ख्वाब़ हों। फिर आत्महत्या  क्यू? कुछ समय तक शोक़ , विस्मय, अवसाद और भाई-भतीजावाद (nepotism)  नें मृत्यु कें कारणों कि रूपरेखा बनाईं। लोगों का प्यार इस 34 वर्षिय अभिनेता के लिए, आक्रोश बन हिन्दीं सिनेमा जगत ( Bollywood) पर फूटा।

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अवसाद और भाई-भतीजावाद (nepotism) को इस कृत का मुख्य आरोपि पाया गया। पर क्या एक अपनें बलबूते पर खड़ा  होने वाला अभिनेता, कुछ लोगो  के तंज मे उलझ कर आत्महत्या कर लेगा? यहीं से इस आत्महत्या पर संदेह शुरू हुआ और उसके साथ शुरू हुई सच की जंग में  सियासत।

हिन्दीं सिनेमा जगत ( Bollywood) के भाई-भतीजावाद (nepotism) ने डाली नीव़ सियासत की

भाई-भतीजावाद (nepotism)  का  मुद्दा कुछ नया नहीं हैं। हिन्दीं सिनेमा जगत ( Bollywood) के काले पन्रों में इसका जिक्र कई बार हुआ हैं। पर इस बार जो आक्रोश जनता ने दिखाया वह हतप्रद करने योग हैं। हाल ही में रिलीज़ हुई|

सड़क-2 फिल्म के ट्रेलर पर 11 करोड़ लोगो ने दिसलाईक (dislike) बटन दबा कर आक्रोश ज़ाहिर किया। बड़े से बड़े दिग्गज अभिनेताओ एवं अभिनेत्रीओ की चुप्पी ने आग मे घी डाल रखा हैं।

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गौरतलाब़ है कि आज 2 महीनें बाद भी सुशांत सिंह राजपूत  के  मुद्दे पर यह कुछ भी  कहने से बचते हैं। इसे इस आत्महत्या के साजिशर्कताओ का डर कहे या हिन्दीं सिनेमा जगत ( Bollywood) के खोखले सितारो का मायाजाल।

सुशांत सिंह राजपूत केस- क्या सियासत की भेंट चढ जाएगी सच की जंग?

जिन्हें जनता बस इनकी फिल्मो के वक्त याद आती हैं। कंगना रनौत के सर्मथन से तो साफ़ हैं कि भाई-भतीजावाद (nepotism) ने किस प्रकार से पाव फैला रखा हैं। कई फिल्मी सितारो ने भाई-भतीजावाद (nepotism) की आपबीती भी साझा की ।

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पिता के नाम पर हर बच्चे का अधिकार होता। पर यह अधिकार किसी दूसरे की प्रतिभा और उसके सपनो को नही छीन सकता। हिन्दीं सिनेमा जगत ( Bollywood) की काली सियासत के शिकार सुशांत सिंह राजपूत  ने फिर भी सबसे लड़ कर अपना मुकाम हासिल़ किया।

सबको हंसाया, रुलाया, धोनी जैसे व्यक्तित्व को परदे पर जीवंत किया। पर इस भाई-भतीजावाद (nepotism) की सियासत ने अवसाद शब्द से श्रद्धांजलि दी सुशांत सिंह राजपूत  को।

आरोप- प्रत्यारोप, शोशल मिडिया को छोड़ना-जुड़ना, कई बड़े नाम उछले पर सुशांत सिंह राजपूत  को क्या मिला? मरने के बाद भी सियासत!

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मुम्बई – बिहार पुलिस प्रकरण – शक़ और सियासत कि खिचीं  गहरी रूपरेखा

सुशांत सिंह राजपूत  केस की पूछताछ एवं सारी कारावाई मुम्बई पुलिस द्वारा की गई और आत्महत्या घोषित किया गया। पर शोशल मिडिया पर लोगो ने इसका तीखा विरोध किया।

सभी ने इस आत्महत्या को हत्या माना। पुरज़ोर विरोध किया गया  मुम्बई पुलिस का, शासन का , कारावाई के तरीको पर। सी.बी.आई. जॉच की मांग कि अपील की गई।

सुशांत सिंह राजपूत केस- क्या सियासत की भेंट चढ जाएगी सच की जंग?

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पद्मश्री कंगना रनौत ने अपना पद्मश्री भी लौटाने की बात रखी। उन्होनें स्वयं सियासत और साजिश कों सच को धकता बताया। रिया चक्रवरती तक ने ट्विटर (twitter) पर गृह मंत्री से सी.बी.आई. जॉच  कि अपील  कर दी। केस के 40 दिन बाद बिहार में सुशांत सिंह राजपूत  केस  नया रूख़ लेती हैं।

सुशांत सिंह राजपूत  के घरवालें दायर करते हैं एफ. आई. आर.(F.I.R) रिया चक्रवरती के खिलाफ। धोखाधड़ी, मानहानी, आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे आरोप दायर हुए। यह केस अब चढ़ता हैं दूसरी सियासत की सिढ़ी। बिहार पुलिस के साथ मुम्बई पुलिस  का व्यवहार बनता हैं सुर्खिया और शक़ के घेरे मे आती हैं , मुम्बई पुलिस ।

बचाव में मुम्बई पुलिस ने तहरीर दी। बिहार पुलिस को एफ.आई.आर पर कारवाई का पूरा हक़ नहीं था। ज़ीरो (zero) एफ. आई. आर होनी थी। दो पुलिस विभाग आपस मे भिड़ जाते हैं।

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कल तक सी.बी.आई. जॉच  कि अपील  करने वाली प्रेमिका केस नहीं चाहती। मीडिया, जनता सब न्यायधीश बन जातें हैं। मुम्बई पुलिस और रिया चक्रवरती दोनो ही मोखौल का कारण बन गए। पर सुशांत सिंह राजपूत को क्या मिला ?  पर इस बार उच्च न्यायलय ने दी एक उम्मीद – सी.बी.आई. जॉच स्वीकार हुई।

पुलिस प्रकरण के बीच सियासी दलों  नें भी किया बहती गंगा में हाथ साफ

मुम्बई पुलिस के वाद- व्यवहार सें शिवसेना की तरफ विपक्ष नें उगली उठाई। बयानों में आदित्य थाकरें का भी नाम उभरा। इसें भी सियासी तूल दिया गया।

सुशांत सिंह राजपूत के घरवालो द्वारा एफ.आई.आर की देरी को भी सियासी रंगरूप कहा गया। बिहार पुलिस के कृत को भी राजनेताओं ने साजिश कहा।

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सी.बी.आई. जॉच के लिए बिहार सरकार के ज़ोर देने पर महाराष्ट सरकार ने पलटवार किया। कोरोना को लेकर सामने आई बिहार की लापरवाही के मुद्दे को घसीटा।

सुशांत सिंह राजपूत केस- क्या सियासत की भेंट चढ जाएगी सच की जंग?

बिहार मे आनेवाले चुनाव को तूल देकर इसे महज़ बिहार सरकार की उनकी छवि साफ़ करनें का रास्ता बताया। सी.बी.आई. जॉच के विपक्ष सहयोग मे खड़ी महाराष्ट सरकार को भी कटघरें मे पाया गया। क्या यह बस मुम्बई पुलिस के कार्यप्रणाली का सर्मथन था या सच पर परदा ?

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बिहार सरकार का क्या यह सच में अपने लाल के लिए मुखार हुआ प्यार था या सच में महज राजनीति या दोंनो? एक के बाद एक बयान , पर बस सच नहीं। सी.बी.आई. जॉच की स्वीकृती नें सुशांत सिंह राजपूत  केस में  राजनैतिक सियासत को थोड़ा थाम दिया। और अगली कणी का जन्म किया।

सियायत बयानबाज़ी की

सी.बी.आई. जॉच की  स्वीकृती नें जन्म दिया बयानबाज़ी की सियायत कों । बयान पहले रिया चक्रवरती के, उनके भाई शौविक के, अधिकारीयों के, सुशांत सिंह राजपूत  की बहन, उनके घरवाले, दोस्तों के।

बयान ड्राइवर कें, डॉक्टरों कें, रसोईये के, रोज़ एक नया बयान , रोज़ नई कहानी। रहस्यमय मृत्यु हैं पर क्या बयान कें आगे कुछ होगा? कब होगा? जिस वक्त सुशांत सिंह राजपूत को श्रद्धांजलि मिलनी थी, उसे मिल रहे हैं बयान! इन बयानो ने सुशांत सिंह राजपूत को अवसाद ग्रस्त , द्विमुखी विकार (bipolar disorder) ग्रस्त, परिवार से टूटा, जिंदगी से हारा बना दिया।

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वक्त के साथ इस कहानी के सुर बदल गए। किरदारों के रंग बदल गए। जो नही बदल रही वो हैं कारावाई की गति। इस पूरें प्रकरण में बयानों के अलावा कोई और गतिविधी का लेखा नहीं हैं।

बयानों के तर्ज पर ही केस लड़ें जाते। पर न्यायधीश भी एक बयान को मान्य कर पाएगा। सियासी दॉव – पेंच से भरे अहम की संतुष्टि करतें बयान सिर्फ सुर्खियों के भुखे मीडिया कर्मी सुनतें हैं।

मीडिया-रिया- सुशांत सिंह राजपूत  और सियासत

सुशांत सिंह राजपूत केस- क्या सियासत की भेंट चढ जाएगी सच की जंग?

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टी.वी. मीडिया कों इस केस से मात्र अपनी टी.आर.पी बढ़ाने मे दिलचस्पी हैं। अरनब गोस्वामी पहले ही इस मुद्दे को लेकर खलबली मचा रखे हैं। यह और कंगना रनौत इस मुद्दे पर सबसे बेबाक तरीकें से बोलते आए हैं।

सुब्रमनिय्म स्वामि जी शोशल मीडिया पर 26 वजह दी सी.बी.आई. जॉच के पक्ष में। सर्मथको ने शोशल मीडिया को ही अदालत बना दिया। रिया चक्रवरती पर बेलगाम आक्रोश जाहिर किया गया और अभी भी जाह़िर हो रहा।

सुशांत सिंह राजपूत के घरवालों के बयान ने से शुरू की नई सियासत। सुशांत सिंह राजपूत की अंतिम यात्रा पर गिने-चुने फिल्मी सितारे नज़र आए। पर रिया चक्रवरती के शोशल मीडिया पोस्त पर फिल्मी सितारे के सांतावना भरे संदेश का ताता लग जाता हैं।

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गौरतलाब हैं कि यही फिल्मी सितारे सुशांत सिंह राजपूत के लिए भी सांतावना देने से गायब नज़र आए। हद तो “आजतक” के लाइव साक्षात्कार मे रिया चक्रवरती के बयान हैं। और धन्य है वों लोग जो इस साक्षात्कार को सच मान रहे।

यहा रिया चक्रवरती के खिलाफ कोई निर्णय नही दिया जा रहा। पर सच बोलेने के लिए सपने की जरूरत उन्हे नही पड़ती जो सच्चे हो। टी.वी. मीडिया ने सुशांत सिंह राजपूत  केस मे चल रही हर सियासत को दिखाया, भड़काया, और खुद के लिए सियासत की भी हैं।

क्या सियासत की भेंट चढ़ जाएगी सच की जंग?

जून से आज सितंबर के पतझण तक आ गया वक्त , वह कभी रूकता नहीं। सर्मथको ने भी हार नही मानी हैं। पर हैरत है उन लोगो पर जिन्हे रिया चक्रवरती के आंसु सच्चे लग रहे, पर सुशांत सिंह राजपूत के पिता के आंसु उन्हे दिख नही रहे।

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जिस बेटे ने सबकुछ दॉव पर लगा पिता के हर आराम को खरीदा। वह पिता उसका अंतिम संस्कार करता हैं।

मनुष्य एक सियासी प्राणी हैं। मुराद पूरी ना हो तो भगवान से सियासत कर ले, भगवान छोड़ राक्षस को पूज दे। पर क्या एक जग-जाह़िर हत्या को हत्या माना जाएगा? क्या सच को इंसाफ मिलेगा? सफ़र लम्बा हैं सच्चाई की जंग का। पर  क्या उससे पहले ही तो नहीं सच सियासत की भेंट चढ़ जाएगा?

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