रामराज्य तो राम के होने से ही संभव है!

रामराज्य तो राम के होने से ही संभव है!

सैकड़ों वर्षों के इन्तजार के बाद मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम मन्दिर के निर्माण की आधार शिला रखने का कार्य आखिरकार हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हो गया। सैकड़ों वर्षों का संघर्ष, हजारों बलिदान, अमानवीय यातनाएँ, अपमान सहने के बाद रामभक्तों की बहुप्रतिक्षित अभिलाषा पूर्ण हुई। ब्रह्माण्ड के नायक और संचालक, हिन्दूओं की आस्था के प्रतीक मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के मंदिर निर्माण का आरम्भ हिन्दुओं के मन में उल्लास का संचार और सुखद अनुभूति का अहसास करा रहा है।

प्रत्येक सनातनी धर्मावलम्बी की आत्मा अकल्पनित सुखद शान्ति का अनुभव कर रही है। आजादी के बाद 70 वर्ष का कानूनी संघर्ष सबसे ज्यादा मन को कचोटने और विचलित कर देने वाला रहा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की कृपा इतनी ही रही कि उन्होंने दृष्टाभाव बनाये रखा।

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मोदी से पूर्व के सभी प्रधानमंत्री अपने ही मकड़जाल मैं फसें रहें

नेहरू से लेकर मोदी से पूर्व के सभी प्रधानमंत्रियों ने जनभावनाओं और राजनीतिक लाभ-हानि की चिन्ताओं से स्वयं बुने मकड़जाल में अपने को घेरे रखा और कभी भी निष्पक्ष भाव से विचार कर उस कल्पित मकड़जाल से बाहर निकलकर आगे बढ़ने का साहस नहीं दिखा सके।

रामराज्य तो राम के होने से ही संभव है!

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मोदी का दृष्टा तथा तटस्थभाव इस विवाद को सुलझाने में सबसे ज्यादा मददगार साबित हुआ। गत छः वर्षों में ऐसे अनेक अवसर आये जब उन्हें उद्वेलित करने का प्रयास किया गया लेकिन इस मुद्दे पर वे शान्त बने रहें। मन्दिर निर्माण के बारे में पूछने पर उनका यही जवाब होता था कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। मन्दिर निर्माण की प्रक्रिया आरम्भ होने के बाद अब रामराज्य लाने की बात की जा रही है। रामराज्य कैसे आयेगा? समाज और सरकार को अब इस पर मंथन करना चाहिए।

श्रीराममन्दिर की आधारशिला रखे जाने के बाद दिये अपने उद्बोधनों में प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मन्दिर बनने के बाद रामराज्य आने का सपना दिखाया। कहा गया कि मन्दिर बनने के बाद पर्यटन के बढ़ने से चैतरफा विकास की बयार बहने लगेगी, रोजगार के अवसर पैदा होंगे। आम आदमी की आय में बढ़ोतरी होगी आदि-आदि। यदि हम वास्तविक दृष्टि से सोचे तो यह जगजाहिर है कि मन्दिर 2-3 वर्षो में पूरा होने वाला नहीं है। बहुत संभवना इस बात की है वर्ष 2025 तक श्रीराम मन्दिर निर्माण का कार्य पूरा किया जायेगा और उसी वर्ष मन्दिर का लोकार्पण किया जाये।

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वर्ष 2025 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण हो जायेगें। स्वाभाविक ही है यह वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए ऐतिहासिक और महत्त्वपूर्ण होगा और यही वह स्वर्णिम अवसर होगा जब एक तरफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा होगा और वही दूसरी तरफ अपनी 100 वर्ष की उपलब्धि के तौर श्रीराममन्दिर का लोकार्पण कर भेंट स्वरूप जनता को समर्पित किया जा रहा होगा।

स्वयंसेवक संघ के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल

यदि परिस्थितियां अनुकूल रही तो 2025 का वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए सोने में सुहागा सिद्ध होगा। अनुकूल परिस्थितियों का अर्थ है कि केन्द्र और राज्य में भाजपा की सत्ता बनी रहे। एक लोकतान्त्रिक राष्ट्र में किसी एक पार्टी के सत्ता में बने रहने की कोई गारन्टी नहीं होती चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी अनुकूल नजर क्यों न आ रही हो। स्मरणीय होगा कि वर्ष 2004 में शाइनिंग इण्डिया का नारा अटल बिहारी की सत्ता वापसी का सूचक माना जा रहा था लेकिन चैरफा चित्त दिखाई दे रही कांग्रेस ने सत्ता में पुनः वापसी की।

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आज जिन समस्याओं को लेकर जनता दुःखी है उनका समाधान मन्दिर निर्माण से नहीं होने वाला। और न ही उसके लिए रामराज्य का होना जरूरी है। भ्रष्टनेताओं और भ्रष्टनौकरशाहों का गठबंधन, पुलिस और अपराधियों का गठबंधन, संस्थागत भ्रष्टाचार ये वे कारण हैं जो आम जनता के लिए सिरदर्द बने हुए हैं।

यह सरकार की कार्यशैली है। मर्यादा से बंधे रहना, कठोर अनुशासन, समान न्याय ये वे गुण है जो राम को राजा राम बनाते है। क्या किसी नेता में इतना साहस है कि इन गुणों के किसी कण से तुलना कर सके? जब इन गुणों से सम्पन्न व्यक्ति सत्ता पर विराजमान होगा तभी रामराज्य की कल्पना साकार हो सकती है।

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रामराज्य तो राम के होने से ही संभव है!

एक तरफ मिथ्या आरोप लगने पर पत्नी का त्याग करने वाला राजा राम है। दूसरी तरफ आज सत्ता के शीर्ष पर ऐसे नेता और मुख्यमंत्री विराजमान है, जो भ्रष्टतम को वरिष्ठतम पद की नीति पर चल रहे है, योग्यता पर धन को अधिमान देकर भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, परिवारवाद में आकंठ डूबे है।

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आजकल एक नया वाद चल पड़ा है ‘पार्टीवाद’, जिसमें भ्रष्टाचार, भाई भतीजावाद, परिवारवाद तथा अन्य पार्टी छोड़कर आने वाले सभी समाहित है। दूसरा है ‘धन वाद’ ऐसे में रामराज्य की कल्पना कैसे संभव है? रामराज्य तो राम के होने पर ही संभव है जिसके लिए कलियुग की समाप्ति का इन्तजार करना ही होगा।

का कथन है कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग प्रतिदिन एक घंटे श्रीराम के गुणों को अपने में आत्मसात करने के लिए आत्मा से अनुग्रह करें। संभव है रामजी की अनन्य कृपा बरस जाये।

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