आयुर्वेद में नींबू के फायदे और इसका महत्व

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भले ही बात अतिश्योक्ति में कही गई हो पर नींबू के बारे में एक किंवदन्ती है- यदि प्रकृति ने नींबू में ‘बीज’ नहीं डाले होते तो इसका रस मृतक को भी जीवित कर देने में समर्थ होगा। ऐसा संभव हो सकता है क्या? यह तो कोई विश्वास पूर्वक नहीं कह सकता पर विश्वास पूर्वक यह अवश्य कहा जा सकता है जिन लोगों को अपच तथा भूख न लगने की शिकायत हो उन्हें दाल सब्जी में प्रतिदिन भोजन के समय एक कागजी नींबू का रस निचोड़कर दाल अथवा सब्जी में पूरी तरह मिलाकर अवश्य सेवन करना चाहिए। इससे अपच तथा भूख न लगने की शिकायत तो दूर होगी ही भोजन में ऐसा स्वाद आयेगा कि दुबारा भोजन की थाली कब आयेगी इसी में ध्यान लगा रहेगा। संभवतः इन्हीं गुणों की जाँच तथा परख होने के कारण अरबी तथा पफारसी हकीमों ने इसे लेमू हाजिम, लेमुने हाजिम तथा लेमुनि लर्श नाम दिया है।

सावधन- इस तरह का प्रयोग करने से पहले कृपया यह अवश्य देख लें कि कहीं आपकी प्रकृति शीत तो नहीं है। अर्थात् यदि आपको स्नोपफीलिया है या जल्दी जल्दी जुकाम होता है तो आप यह प्रयोग न करें। मन न माने तो कटे हुए नींबू में हलका नमक डालकर उसे आँच में थोड़ा गर्म करके चूसें पिफर नींबू नुकसान नहीं करेगा। जुकाम की स्थिति में भी उबलते हुए जल में हल्का नमक तथा चीनी और नींबू का रस लिया जाये तो जुकाम में भी अवश्य लाभ मिलेगा।

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पेट के कीड़ों को नष्ट करने, पेट में दर्द अथवा अपफरा हो उसे भी नींबू चाकस चैकीदार की तरह दूर भगाता है। इसे वैद्यों ने वात पित्त कपफ सम्बंध्ी समस्त शूल रोगों के लिए बहुत उपयोगी बताया है। हैजा रोग में इसे अवश्य प्रयोग कराया जाता है साथ ही जिनका मल पेट में ही सूख जाता है ऐसे लोगों को भोजन में नींबू को अवश्य स्थान देना चाहिए। जिन्हें मूत्रा आने में जलन अथवा अन्य प्रकार की शिकायत हो उन्हें भी नींबू का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।

रक्त पित्त के शमन में भी नींबू की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई है। हृदय तथा आँखों के लिए भी नींबू का उपयोग बहुत लाभदायक माना जाता है। नींबू प्यास निवारक गुण की पहचान के कारण ही भारतवर्ष के गाँवों में गर्मियों के दिनों में आये हुए अतिथियों अथवा लू और गर्मी से लौटे हुए घर वालों को शर्बत में नींबू डालकर पिलाया जाता है। इससे बार-बार पानी पीने और पेट पफुला लेने की तृष्णा तनिक देर में ही दूर हो जाती है इसके रस मंे साइट्रिक एसिड तथा विटामिन सी की मात्रा बहुतायत से पाई जाती है नींबू के छिलके में एक प्रकार का तेल भी होता है प्रकृति ने उसे किसी महत्वपूर्ण उपयोग में उत्पन्न किया होगा।

शीत प्रकृति के लोग भी यदि नींबू का प्रयोग न कर सकंे तो वे विभिन्न मसाले डालकर बनाये गये नींबू के अचार का उपयोग कर सकते है। नींबू के रस की तरह नींबू का अचार भी मंदाग्नि दूर कर भूख को बढ़ाने में सहायक होता है।

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