ज्योतिष के अनुसार क्रोध का कारण मंगल

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आप सभी धर्म प्रेमियों को मेरा सादर प्रणाम। बहुत से लोग मेरे पास आकर कहते हैं कि हमें बहुत ज्यादा गुस्सा आता है। गुस्सा किन ग्रहों के कारण आता है और इसे छोटे-छोटे उपायों द्वारा कैसे दूर किया जाए ?

मनुष्य को अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना बहुत आवश्यक हैं, क्योंकि क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि का नाश होता हैं जब बुद्धि का नाश हो जाता है तो मनुष्य का पतन निश्चित ही होता है। अब हम बात यह करेंगे कि मनुष्य को क्रोध किन कारणों से आता है।
जन्मकुंडली में सूर्य और चंद्रमा, मंगल ग्रह एक-दूसरे के साथ किसी रूप में सम्बद्ध है तो व्यक्ति के अन्दर क्रोध अधिक रहता है। इसके अलावा (मंगल+ शनि) ( मंगल+ राहु,केतु) ,(मंगल+सूर्य)की युति क्रोध को जिद के रूप बदल देती है। इसके अलावा जो जातक मांगलिक होते है और राहु के लग्न, तृतीय अथवा द्वादश स्थान में होने पर काल्पनिक अहंकार के कारण अपने आप को बड़ा मानकर अंहकारी बनाता है, जिससे क्रोध उत्पन्न हो सकता है।ज्योतिष में मंगल को क्रोध, वाद- विवाद, लड़ाई -झगड़ा, दुर्घटना, अग्निकांड, विद्युत आदि का कारक ग्रह माना गया है तथा राहु को आकस्मिकता, आकस्मिक घटनाएं, शत्रु, षड़यंत्र, नकारात्मक ऊर्जा, तामसिकता, बुरे विचार, छल, और बुरी आदतों का कारक ग्रह माना गया है, इसलिए फलित ज्योतिष में मंगल और राहु के योग को बहुत नकारात्मक और उठापटक कराने वाला योग माना गया है ।

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ज्योतिष के माध्यम से छोटे-छोटे उपायों द्वारा क्रोध को कम किया जा सकता है : एक तांबे के लोटे में जल भरकर चांदी का सिक्का डालकर अपने सिरहाने के नीचे रखें और सुबह हाथ मुंह धो कर उस जल का सेवन करें ।

प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें। प्रत्येक शनिवार को साबुत उड़द की दाल का दान करें। प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी को लड्डू का भोग लगाएं सिंदूर चढ़ाएं गाय को गुड़ खिलाएं। प्रतिदिन मस्तक पर सफ़ेद चन्दन का तिलक लगाएं। बिना जोड़ वाला छल्ला या कड़ा सोमवार को धारण करने से क्रोध में कमी आती है। चांदी के गिलास में पानी और दूध का सेवन करें। बड़े बजुर्गों के चरण स्पर्श करना और उनसे आशीर्वाद लेना क्रोध की शांति के लिए शुभ होता है। मंगलवार को आठ मीठी रोटी कौवे को या कुत्तों को खिलानी चाहिए।
जिन जातकों को क्रोध अधिक आता हैं उन्हें लाल रंग का प्रयोग कम से कम करना चाहिए।

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