October 31, 2020
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होम्योपैथी इलाज कर सकता है अंग्रेजी डॉक्टरों की दुकाने बंद डॉ रमेश श्रीवास्तव

जब एक डॉक्टर, समूचे विश्व के डॉक्टरों को खुलेआम चुनौती दे, जब कोई डॉक्टर लाइलाज कैंसर जैसी बीमारी को ठीक करने का दावा करे, जब कोई डॉक्टर कनिका कपूर जैसी अभिनेत्री को कोरोना होने पर ठीक करने का दावा करे और जब कोई डॉक्टर अपने ही समुदाय के डॉक्टरो को खुलेआम लुटेरा कहे तो आप उस डॉक्टर को निश्चित ही एक पागल डॉक्टर कहेंगे।

बात कुछ ही दिन पहले की है मैं हरिद्वार से अपने घर लालगंज रायबरेली आया था, हर बार की तरह इस बार भी मैं अपने दोस्तों के साथ जो कि यहाँ पत्रकार है बैठे एक प्रोग्राम के बारे में बात कर रहे थे। सिद्धार्थ जी जिन्हें हम सब प्यार से दद्दा बोलते हैं उन्होंने होटल वाले को चाय समोसे का आर्डर दिया। यह वही होटल था जहाँ हम सब हमेशा बैठा करते थे, नाश्ता टेबल में लग चुका था, सारे लोग आपस मे बात करते हुए नाश्ता भी कर रहे थे।

मैं भी बैठा बात कर रहा था लेकिन कुछ खा नही रहा था, इस बात को दद्दा की नजरों ने पकड़ लिया और जिसका मुझे डर था वही हुआ ,उन्होंने पूछ ही लिया कि क्या बात है सचिन कुछ खा नही रहे, अब मुझे उत्तर देना ही पड़ा, मैने बोला दद्दा यूरिक एसिड का प्रॉब्लम है काफी दवाई की लेकिन कुछ आराम नही मिला, इसलिए परहेज कर रहा।

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थोड़ी देर सोचने के बाद दद्दा ने कहा कि आप होम्योपैथी इलाज कराइए, एक डॉक्टर के बारे में उन्होंने बताया जो कि रायबरेली में रहता था। उन्होंने उनके बारे में कई रोचक किस्से सुनाए, उन किस्सो को सुनने के बाद मैंने सोचा क्यों न एक बार इनसे भी मिला जाए। मुझे रायबरेली किसी काम से जाना ही था तो सोचा उसी दिन मिल लेंगे, उस समय तक मेरे दिमाग मे दवाई लेने से ज्यादा डॉक्टर से मिलने की ललक थी। मैं उस व्यक्ति को देखना और समझना चाहता था, जो किस्से मैने सुने थे उनको सुनने के बाद यही सोच रहा था कि क्या सच मे कोई होम्योपैथी डॉक्टर इतना बड़ा समाजवादी औऱ एलोपैथी के डॉक्टरों की सच्चाई उजागर करने वाला हो सकत है।

दूसरे दिन मैं रायबरेली शहर में था एक दो अपने काम निपटाने के बाद मैं दद्दा के बताए पते जो कि सिविल लाइन चौहरे के पास था, पहुँच गया था। डॉक्टर साब का घर खोजने में ज्यादा मसक्कत नही करनी पड़ी ट्रांसफार्मर वाली गली में मुडते ही सौ मीटर में एक खुले गेट से एक पति पत्नी बच्चे को लिए निकले, उन्हें देखते ही मैं समझ गया कि यही डॉक्टर साब का घर है फिर भी मैने उनसे डॉक्टर साब का नाम लेते हुए पूछ ही लिया क्या यह उनका घर है, उस व्यक्ति ने सहमति में सर हिलाते हुए खुले दरवाजे की तरफ इशारा कर दिया।

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गेट से अंदर घुसते ही दाहिने हाथ मे एक कमरा था जिसमे अंदर कुछ लोग बैठे नजर आ रहे था, मैं देखते ही समझ गया डॉक्टर साब अंदर कुछ मरीजो के साथ बैठे हैं।
मैने बडी शालीनता से दरवाजा खोला और कमरे में पड़ी कई खाली कुर्सियों में से एक मे चुपचाप बैठ गया।

मेरे सामने डॉक्टर साब एक कुर्सी में बैठे थे, उनकी पीठ मेरी तरफ थी और वो सामने बैठे एक पेसेंट से बात कर रहे थे, वो दो लड़के थे एक हाथ मे प्लास्टर चढ़ा हुआ था, जो डॉक्टर साब को अपनी व्यथा बताने में लगा था, वो इतना ज्यादा बोल रहा था कि मेरा वहाँ बैठना मुझे भारी लगने लगा था लेकिन वो पता नही कैसा डॉक्टर था जो उस मरीज से लगातार हसके बात कर रहा था, और सिर्फ बात ही नही उसकी फालतू की बाते भी बड़ी ध्यान से सुन रहा था, यह देखकर मुझे कुछ अजीब सा लगा क्योंकि अक्सर डॉक्टरों की त्योरी चढ़ी ही होती है और वो पेसेंट को ज्यादा टाइम भी नही देते, लेकिन यह डॉक्टर साब उसकी बकवास पिछले आधे घंटे से सुन रहे थे, और मैं चुपचाप कभी डॉक्टर को कभी पेसेंट को देख रहा था।

मुझे हैरानी तो तब हुई जब उस पेसेंट ने डॉक्टर साब को बोला कि मेरा हाथ एक महीने में जुड़ जाना चाहिए और डॉक्टर साब ने बड़े ही आत्मविश्वास से उसको उत्तर दिया था कि एक महीने में बिल्कुल ओके कर दूंगा।

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आत्मविश्वास की झलक

मैने आज तक उससे ज्यादा आत्मविश्वास किसी डॉक्टर में नही देखा।

काफी देर बाद आखिरकार वो उठे तब मेरा नम्बर आया और मैं डॉक्टर साब के सामने वाले सोफे में जाकर बैठ गया, मैने डॉक्टर साब को अपने बारे में बताया, उन्होंने जब यह सुना कि मैं इलाज नही बात करने आया हूँ तो मुझे उन्होंने बगल वाले कमरे में बिठा दिया।

थोड़ी देर बाद डॉक्टर साब खुद चाय लेकर आ गए थे, अब हम दोनों आमने सामने बैठे थे, वह कमरा उनको मिले सम्मानो की फ़ोटो से भरा पड़ा था।

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थोड़ी सी औपचारिक बातों के बाद मैंने देश की आज की स्वास्थ्य व्यस्थाओं के बारे में बात की, होम्योपैथी जैसी कारगर और सस्ती उपचार की विधा की दुर्दशा की बात की।

उनकी कही बातें आज भी मेरे कानों में गूँजती है, उन्होंने बिल्कुल निडर भाव से कहा सचिन आजकल यह जितने नर्सिंग होम्स और ऐलोपैथिक के डॉक्टर बैठे हैं जितनी बड़ी बड़ी डिग्रियां इनके नामों के साथ लगी हैं यह सब दुनिया को लूट रहे हैं।

उनके दिए कई उदाहरणो के बाद मुझे मानना पड़ा कि वह शत प्रतिशत सच बोल रहे हैं और हम आजतक अंधेरे में जी रहे थे, उन्होंने बताया कि होम्योपैथी में कैंसर से लेकर कोरोना तक का इलाज है लेकिन होम्योपैथी को प्रमोट करने वाला कोई नहीं। उसका जो सबसे कारण उन्होंने बताया वो यह था कि स्वास्थ्य विभाग के उच्च पदों पर जो अधिकारी बैठे हैं वह सारे एलोपैथिक डॉक्टर है और वो नही चाहते कि कोई होम्योपैथी डॉक्टर ऊपर आए, या कोई होम्योपैथी को वरीयता दे, यही कारण है जिसकी वजह से आज हमारे देश के करोङो लोग अच्छे और सस्ते उपचार से वंचित रह जाते हैं और ऐलोपैथिक दवाएं खाकर जिंदगी भर बीमार पड़े रहते हैं।

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होम्योपैथी

डॉक्टर साब ने अपने कई व्याख्यान और विडियो दिखाए जो वास्तव में बहूत आश्चर्यजनक थे, करीब दो घंटे बात करने के बाद मैने उन्हें अपनी यूरिक एसिड वाली प्रॉब्लम के बारे में बताया, सुनते ही उन्होंने बोला, अभी ठीक कर देते हैं। उनका यूँ बोलना सुनकर मुझे लगा मजाक कर रहे हैं।

जाने का टाइम हो गया था वो एक छोटी सी पुडिया में दवा लेकर आ गए थे उन्होंने मुझसे मुँह खोलने को कहा और अपने हाथ से दो छोटी छोटी मीठी गोलियां जिनका आकार एक सरसों के बीज के बराबर था मेरे मुँह में डाल दी, साथ मे एक पुड़िया देते हुए बोले सुबह शाम खा लेना ।

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आज दो दिन हो गए मै सब कुछ खा रहा लेकिन मुझे कोई प्रॉब्लम नही हुई, फिर मेरे दिमाग मे वही बात आई कि आजतक मैं अंधेरे में था, एलोपैथिक झूठे जंजाल में फंसा पड़ा था।

आखिरकार मुझे विश्वास हो गया की इनकी वो सारी कहानी, चाहे वो एक गूंगी बहरी लड़की को ठीक करने की हो चाहे वो कैंसर ठीक करने की हो या और भी बहुत सारे केस जो कि दुनिया के बड़े बड़े अस्पताल से लौटने के बाद ठीक होने के हो, सब सही हैं।

वो पागल डॉक्टर और कोई नही रायबरेली के होम्योपैथी डॉ रमेश श्रीवास्तव हैं।

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