मकर संक्रांति पर स्नान एवं दान का विशेष महत्व

वैसे तो भारत वर्ष में कई त्योहार मनाए जाते हैं लेकिन मकर संक्रांति का कुछ विशेष महत्व है। दरअसल, यही एकमात्र त्योहार है जो देश

भक्तों की हर मन्नत पूरी होती है मायादेवी मन्दिर में

भगवान शिव की अर्धांगिनी और प्रजापति राजा दक्ष की सुपुत्री सती के आत्मदाह के साथ ही तीर्थ नगरी हरिद्वार को सप्तपुरियों में से एक मायापुरी

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार-दक्षिणावर्ती शंख ::

दक्षिणावर्ती शंख :: द्विधासदक्षिणावर्तिर्वामावत्तिर्स्तुभेदत: दक्षिणावर्तशंकरवस्तु पुण्ययोगादवाप्यते यद्गृहे तिष्ठति सोवै लक्ष्म्याभाजनं भवेत्। दक्षिणावर्ती शंख पुण्य के ही योग से प्राप्त होता है। यह शंख जिस घर

छठ महापर्व: बिहार में क्यों?

वैदिककालीन मध्य भारतवर्ष के कीकट प्रदेश में गयासुर नामक एक दानव रहता था| वह भगवान विष्णु का उपासक था| गयासुर की काया भीमकाय थी| कहते

मां मनसा देवी बारह नामों से भिन्न-भिन्न स्थानों पर पूजी जाती है

उत्तराखंड में शिव के साथ-साथ शक्ति की पूजा का भी अत्यधिक महत्व है ।शिव के बिना शक्ति अधूरी है और शक्ति के बिना शिव। इसीलिए

रामराज्य तो राम के होने से ही संभव है!

सैकड़ों वर्षों के इन्तजार के बाद मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम मन्दिर के निर्माण की आधार शिला रखने का कार्य आखिरकार हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हो गया।

क्या राम मंदिर ने हिन्दू विरोधी राजनीति के विकल्प का अंत कर दिया?

जिस दिन से अयोध्या नगरी में भूमि पूजन की तिथि निर्धारित हुई उसी दिन से राजनीति में एक नई बदलाव की बयार देखने को मिली-हमरे

आध्यात्मिक केन्द्र और कुम्भनगरी हरिद्वार का एक परिचय

हिमालय की तलहटी में शिवालिक श्रेणी के अन्तर्गत समुद्रतल से 294 मीटर ऊँचाई पर पवित्र गंगा के दाहिने किनारे पर हरिद्वार तीर्थ स्थित है। हरिद्वार

"ब्राह्मणवाद" के नाम पर मिथ्याप्रचार: भाग-2

मित्रों, यदि मैं कहूं कि संम्पूर्ण भारतीय सभ्यता की अवधि में (पूर्व-वैदिक और उत्तर-वैदिक काल से आज तक) पहला संगठित “जातीय” अत्याचार ब्राह्मणों पर हुआ

"ब्राह्मणवाद" के नाम पर मिथ्याप्रचार: भाग-1

मित्रों, मैं जाति विषयक विवादों पर कुछ भी लिखने से बचना चाहता था। मेरे लिए राष्ट्रीयता और समग्र सनातन समाज अधिक महत्वपूर्ण था/है। मगर समाज