पत्रकारिता की कसौटी की भी कसौटी होनी चाहिए

पत्रकारिता का अस्तित्व ही सवाल पूछने और शासन में बैठे लोगों की जवाबदेही तय करना है। लेकिन इस जवाबदेही से मीडिया भी अछूती नहीं। अब

हिन्दुओ का दमन करने की कोशिश कई बार हुई

महाकुंभ की पौराणिक, ऐतिहसिक, काल्पनिक या वैज्ञानिक चर्चाओं से हिन्दु संस्कृति एवं भावनाओं का अटूट सम्बन्ध है। इस सम्बन्ध को विकृत स्वरूप दिये जाने की

लव जिहाद के लिये पूरी तरह शासन दोषी है

उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और अन्य भाजपा शासित राज्यों में छल, ठगी, बदनीयती और समाज विशेष के प्रति गहरे विद्वेष तथा हिकारत और उसे क्रमशः रूपान्तरित कर

अब इससे अधिक जंगलीपना और क्या होगा!

अपने समाज में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और बलात्कार जैसी घटनाओं की चर्चा सभी करना चाहते हैं लेकिन उसके कारणों की नहीं। इन बलात्कारियों की

भारतीय शिक्षा की पुनः प्रतिष्ठा कैसे हो ?

भारतीय शिक्षा की पुनः प्रतिष्ठा कैसे हो, इस पर विचार का आग्रह किया गया है। यहाँ कुछ प्रारंभिक विचार आवश्यक हैं। सर्वप्रथम तो यही विचार

विश्व का सर्वाधिक संगठित समाज है हिन्दू समाज

संसार के सभी समाजों के संगठन के जो आधार होते हैं, वे सर्वविदित हैं। सर्वप्रथम तो यह आधार समान पूर्वजों के वंशज होने की स्मृति

न्यायपूर्ण फैसले के लिए जज को अपने पद के पावरफुल स्मृति में रहना होगा

निर्बलता है तो असफलता भी है, असफलता का कारण निर्बलता है। हमारी असफलता के पीछे समर्थता का अभाव है। हम चाहते तो बहुत कुछ हैं,

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