October 31, 2020
भारतीय इतिहास के 7 सबसे बड़े झूठ

भारतीय इतिहास के 7 सबसे बड़े झूठ

इस लेख में हम पढ़ेंगे की जो इतिहास हमें पढ़ाया जाता है क्या वह सच है या नहीं?

इतिहास में कुछ बातें ऐसी भी हैं जो हमें नहीं बताई जाती हैं। आज हम उन बातों के बारे में चर्चा करेंगे, जो इतिहास में सच तो थी लेकिन अभी हमें वह बातें सच नहीं बताई गयीं हैं।

आज हम बात करेंगे ‘भारतीय इतिहास के 7 सबसे बड़े झूठ’ के विषय मे।

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भारतीय इतिहास के 7 सबसे बड़े झूठ में से झूठ नंबर 1

मुग़ल शासक महान थे

जरा आप ही सोचिए! वह इतिहास कैसे सच हो सकता है? जिसमें डेढ़ सौ साल राज करने वाले मुगलों को महान बताया गया है, और कई हजार साल तक राज करने वाली हिंदू राजाओं का जल्दी इतिहास में नाम तक नहीं आता है। और आता भी है तो उन्हें मुगलों से कमजोर बताया जाता है।

मुझे याद है कि जब मैं छोटी कक्षाओं में पढ़ा करता था। इतिहास में मुगलों के शासन के बारे में बताया जाता था। कहीं भी नहीं बताया जाता था कि हिंदू राजा कितने महान थे। मुझे याद है कि उस में कहीं भी जल्दी विजयनगर राज्य का उल्लेख नहीं होता था। जबकि विजयनगर राज्य के राजा लोग बहुत ही महान थे। यहां पर कृष्ण देव राय जी का भी शासन चला था, जो कि सबसे महानतम राजाओं में से एक थे।

विजय नगर में 300 सालों तक राजा कृष्णदेव राय के वंशजों ने राज्य किया था। जबकि मुगलों ने डेढ़ सौ साल तक राज्य किया था। वह भी भारत के उत्तरी भाग के कुछ हिस्सों तक ही सीमित था। लेकिन विजयनगर राज्य उससे बड़ा था।

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मुगलों के सामने मराठा लोगों को भी बहुत कमजोर दिखाया गया है। लेकिन मराठा लोग मुगलों से कई ज्यादा ताकतवर थें।

मुगल शासकों को बहुत ही ज्यादा दानवीर और महान बताया गया है। लेकिन सच्चाई यह है कि वह बहुत क्रूर और निर्दयी राजा थे। उन राजाओं ने कई हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराकर उन्हें मुस्लिम बना दिया। और जिन हिंदुओं ने मुस्लिम धर्म नहीं स्वीकार किया उन्हें मरवा दिया गया।

भारत के इतिहास में भारत वासियों को मुगलो का गुलाम बताया गया है। जबकि वास्तविकता कुछ और है। भारतीय इतिहास में बताया गया है कि भारत में जितने भी विकास कार्य हुए वह सब मुगलों के शासन में हुए। हमसे वह सब बातें छिपाई जा रही हैं जो कि बताती हैं कि हमारा भारत कितना महान था, और उसके हिंदू शासक लोगों ने हमारे देश का कितना विकास किया।

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मुग़ल इतने निर्दयी थे की जो उसके सामने आत्मसमर्पण करता था वो उसको भी मरवा देते था।

राजा अकबर का एक संरक्षक था बैरम खान। वो राजा अकबर को बहुत मानता था। और अकबर ने उसे क्या दिया? अकबर ने उसकी पत्नी को उससे छीन लिया क्योंकि वो काफी सुन्दर थी। और उसे देशद्रोही घोषित कर दिया। और उसे मृत्युदंड दे दिया।

जब वो राजा उनके भी सगे न हुए, जो उनके लिए जान देने को तैयार थे। तो वो देश के लोगो के लिए दयालु कैसे हो सकते हैं?

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भारतीय इतिहास के 7 सबसे बड़े झूठ में से झूठ नंबर 2

आर्य बाहर से आये थे और वो भारतीय नही थे

भारतीय इतिहास में ऐसा कहा जाता है की आर्य भारतीय नहीं थे। बल्कि वो बाहर से आये हुए थे।

इतिहास में बताया गया है की आर्य लोग काफी पढ़े लिखे और ज्ञानी थे। उन्हें सभ्यता और संस्कृति का बहुत अच्छा ज्ञान था।

यह बात मैक्स मूलर ने कही थी की आर्य बाहरी थे। और तो और उन्होंने इस पर एक थ्योरी भी लिखी। जिसमे लिखा गया की कैसे आर्य भारत में आये थे। इसे आर्यन इन्वेंज़ थ्योरी के नाम से जाना जाता है। लेकिन ये थ्योरी तब गलत साबित होती दिखाई देने लगी, जब सिन्धु नदी के किनारे पुरानी सभ्यता के निशान मिलना शुरू हो गए।

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कोई एक बात होती तो छिपा भी लेते। लेकिन बहुत सारे निशान मिलने की वजह से इस बात को छिपाना बहुत मुश्किल हो गया। तो उन्होंने एक और झूठ बोलना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि जो सिन्धु नदी के किनारे रहते थे वो द्राविड लोग थे, और ये आर्य के समय से पहले यहाँ रहते थे।

और जब आर्य लोगो ने इन पर आक्रमण किया तो इन्हें हराकर अपना गुलाम बना लिया और इन्हें दस्यु कहा जाने लगा। ये बात की द्राविड हार गए थे ये बात ज्यादा लोगो को पची नहीं। क्योंकि सिंधुघाटी की सभ्यता इतनी विकसित थी की उन्हें हराना मुश्किल था। उस वक़्त सिंधुघाटी सभ्यता में लोग स्विमिंग पूल बनाते थे। जब बाकी सभ्यताओं का कहीं नाम तक नहीं था।

ये बात तब झूठी साबित हो जाती है, जब हम ऋग्वेद की बात करते हैं। उसमे कहीं भी नहीं लिखा की किसी समाज ने भारत देश पर आक्रमण किया हो।

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और तो और ऋग्वेद में यह भी कहा गया है की दस्यु और आर्य दुश्मन नहीं थे। उनमे कभी भी किसी तरह का कोई भी युद्ध नहीं हुआ। हाँ कभी कभी छोटे छोटे विवाद ज़रूर हुए लेकिन वो युद्ध नहीं थे।

ऋग्वेद में बताया गया है की दस्यु और आर्य एक साथ मिलकर अपने दुश्मनों से लड़ते थे और उनके दुश्मन एक ही थे। और इसी वजह से आर्य बाहरी थे ये बात झूठ साबित हो जाती है।

भारतीय इतिहास के 7 सबसे बड़े झूठ में से झूठ नंबर 3

आर्य यूरोप के थे

ऐसा कहा जाता है की आर्य यूरोप से आये हुए थे। और उन्होंने भारत पर आक्रमण करके उसको अपने अधीन कर लिया था।

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लेकिन ये बात भी झूठी साबित हो जाती है। जब हम ऋग्वेद की बात करते हैं। उसमे काफी जगह पर कहा गया है की आर्य कहते हैं की भारत के वासी ही महान हैं और बाकी सब मलेच्छ हैं।

ऐसा कैसे हो सकता है की एक यूरोप का इन्सान खुद को ही मलेच्छ कहे। और दूसरे देश के लोगो को महान कहे। इसलिए ये बात साफ़ झूठ है।

भारतीय इतिहास के 7 सबसे बड़े झूठ

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भारतीय इतिहास के 7 सबसे बड़े झूठ में से झूठ नंबर 4

भारत का जन्म सिधुघाटी सभ्यता के साथ हुआ था

भारत की सभ्यता का जन्म सिन्धुघाटी सभ्यता से हुआ है। ऐसा इतिहासकारों का कहना है।

लेकिन ये बात पूरी तरह झूठ है। चलिये अगर इनकी बात को सच मान लें। तो हमारी सभ्यता सिर्फ 2500 से 3000 ई पू की है। जबकि हमारे वेद इतने पुराने हैं जितनी की धरती।

तो ऐसा कैसे हो सकता है की जब कोई रहा ही न हो और वेद लिख दिया गया हो। अगर वेदों की माने तो हमारी सभ्यता तब की है जब धरती बनी थी। और इस हिसाब से भारत की सभ्यता सबसे पुरानी सभ्यता है। जो की सत्य भी है। क्योंकि बिना किसी के हुए वेद लिखा जाए ऐसा तो संभव नहीं है।

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इस बात को झूठ साबित करने के लिए की भारत की सभ्यता सबसे पुरानी नहीं है उन्होंने वेद को ही गलत बता दिया। उन्होंने कहा की वेद जैसी कोई चीज़ है ही नहीं। और ये सब झूठ है। ये सब जल्दी ही लिखा गया है।

भारत के धौलावीरा में हुई खुदाई में 10000 ई पू के अवशेष मिले। जिससे साफ हो गया की भारत की सभ्यता सिंधुघाटी सभ्यता के पहले की है। और वो सब इतिहासकार अपना सा मुहं लेकर रह गए।

भारतीय इतिहास के 7 सबसे बड़े झूठ में से झूठ नंबर 5

आदिमानव मांसाहारी थे

हमे इतिहास में ये बताया गया है की हमारे पूर्वज बन्दर थे। और फिर धीरे धीरे उनका विकास हुआ। शुरू शुरू में वो जंगलो में रहते थे और जानवरों को भोजन के रूप में खाते थे। लेकिन ये बात कही किसने? क्या किसी भारत के विद्वान ने या विदेशो के? ये बात कही थी डार्विन ने। जो की भारत के नहीं थे।

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इतिहास की खोज अब तक जहाँ तक हुई है वहां तक कोई भी ऐसा ठोस प्रमाण नहीं मिला जिससे साबित हो सके की आदिमानव मांसाहारी थे। और तो और ये बात कही गयी है पश्चिमी सभ्यता के लोगो के लिए। लेकिन ये जान लेना ज़रूरी है की क्या मानव का विकास सबसे पहले पश्चिमी सभ्यता में हुआ था? तो उत्तर है नहीं।

मानव सभ्यता का सबसे पहले विकास भारत में हुआ है। जो की मांसाहारी थे इस बात की कहीं पुष्टि नहीं होती है। साथ ही साथ कुछ ऐसे तर्क भी मिलते हैं, जिनसे हमे पता चलता है की भारतीय आदवासी मांसाहारी नहीं थे।

ऋग्वेद – यह वेद तब का है जब मानव सभ्यता का विकास हुआ था। इसमें साफ़ लिखा है की मानव को यज्ञ करना चाहिए। और तो और इसमें कहीं भी हिंसा का नाम तक नहीं आता है। बल्कि कहा गया है की इन्सान को सबकी रक्षा करनी चाहिए और दया भाव रखना चाहिये।

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तो आप ही सोचिये। जो लोग सबके प्रति दया भाव रखने को कहते हैं और अहिंसा की बात करते हैं। वो कैसे किसी को मार कर खा सकते हैं? और तो और एक जगह ये भी कहा गया है की जो लोग मांस खाते हैं उनको मार देना चाहिए। और उनको दानव की श्रेणी में रखा गया था।

यजुर्वेद-  इस वेद में साफ लिखा है की पशु हत्या करना पाप है। और तो और उनको पालने के लिए कहा गया है। तो आप ही सोचिये। जब पशु को मारना ही मना है तो उसको कोई खाने की कैसे सोच सकता है?

अथर्ववेद- इस वेद में साफ़ तौर से कह दिया गया है की मांस खाने वाला, नशा करने वाला और दया भाव न रखने वाला दोषी है। उसको मार देना चाहिये। इस वेद में एक जगह ये भी कहा गया है की गाय का दूध, दही, घी खाने योग्य है लेकिन मांस नहीं।

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इन तीनो बिन्दुओं से साफ हो जाता है की भारत के आदिवासी लोग आर्य थे। और वो मांस नहीं खाते थे।

भारतीय इतिहास के 7 सबसे बड़े झूठ में से झूठ नंबर 6

भारतीय ग्रंथ झूठ हैं।

जिन भी इतिहासकारों ने भारत के इतिहास को गलत लिखा। उनको पता था की उनकी सारी चोरी पकड़ी जायेगी। अगर भारत के सभी ग्रंथो को सही मान लिया गया।

इसलिए उन्होंने कहना शुरु कर दिया की भारत के इतिहास के जितने भी वेद और ग्रन्थ हैं वो सब गलत हैं। अगर वो ऐसा नहीं कहते तो लोग सच्चाई जान जाते। इसलिए उन्होंने ऐसा कहना शुरू कर दिया था। ये बातें अंग्रेज और वामपंथियों ने कही और भारत के इतिहास को गलत साबित करके रख दिया।

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बात तो यहाँ तक पहुच गयी की भारत की सरकार (कांग्रेस) ने भी साफ़ कह दिया की राम भगवान नहीं थे। उन्होंने रामसेतु को तोड़ने तक की योजना बना ली थी। लेकिन सच्चाई कितने दिन छिपती? आज देखिये आखिर सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया की भगवान राम थे। और तो और रामजन्म भूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण का कार्य भी शुरू हो चुका है।

रामायण के सुन्दरकाण्ड में बताया गया है की जब हनुमानजी सीताजी की खोज के लिए गए थे। तो उन्होंने वहां पर 3 और 4 दांत वाले हाथी देखे थे। ये बात तब सत्य हो गयी, जब आधुनिक प्राणी शास्त्रियों ने कहा की आज के १० लाख साल पहले ऐसे हाथी हुआ करते थे लेकिन अब वो ख़त्म हो गए हैं।

इस बात से यह साफ हो गया की रामायण असली है। और तो और साथ ही यह भी साफ़ हो गया की रामायण की कथा १० लाख साल पुरानी है। यानी की भारत की सभ्यता १० लाख साल पहले भी थी। जो सबसे पुरानी सभ्यता है।

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भारतीय इतिहास के 7 सबसे बड़े झूठ में से झूठ नंबर 7

महाराजा शिवाजी लूटेरे और धोखेबाज़ थे

पहले कुछ इतिहासकार कहते थे की शिवाजी लूटेरे और धोखेबाज़ थे। हालाकि अब ऐसा कहने वाला कोई नहीं है। जो इतिहासकार ये कहते थे। उनका मुख्य काम था की किसी तरह भारत के गौरव को नष्ट करना और मुगलों को महान बताना।

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लेकिन सच्चाई कहाँ तक जाती है? दुनिया समय के साथ साथ बुद्धिमान होती जा रही है। और समझती जा रही है की उसके इतिहास में क्या झूठ लिखा है और क्या सच। कुछ इतिहासकारों ने मराठा लोगो को मुगलों से कमज़ोर दिखाने का काम किया है।जो की सत्य नहीं है।

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मराठा लोग बहुत ही बलशाली और साहसी थे। आप खुद ही सोचिये!  जिनके गुरु रामदास इतने अच्छे स्वाभाव के थे। वो लूटेरे कैसे हो सकते हैं?  ये सब मुगलों की एक चाल बस थी।

कहा जाता है की वो मुस्लिम विरोधी थे। जो की साफ़ झूठ है। उनके सेना में कई मुस्लिम सैनिक थे। और तो और कई मुस्लिम अच्छे अच्छे पदों पर भी थे। हाँ ये बात सही है की वो मुगलों के खिलाफ थे और उनको विदेश से आया हुआ लूटेरा मानते थे।

ऐसा कहा जाता है की वो धोखेबाज़ थे। उन्होंने अफज़ल खान को धोखे से मारा। तो ये कहानी पूरी तरह जान लेते हैं। फिर आप खुद सोच लीजिए की धोखेबाज़ कौन था?

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शिवाजी के साहस को देखकर बीजपुर के राजा आदिलशाह काफी परेशान हो गए। उन्होंने काफी कोशिश की कि वो शिवाजी को किसी तरह कैद कर लें। लेकिन वो कभी सफल नहीं हुए। जब आदिलशाह को कोई रास्ता नहीं मिला तो उन्होंने शिवाजी के पिता शाहजी को बंदी बना लिया।

लेकिन शिवाजी ने साहस और छापेमारी युद्ध की नीति से उन्हें छुड़ा लिया। इस घटना से आदिलशाह आगबबूला हो गया। और उसने अपने सेनापति अफजल खान को शिवाजी को जिंदा या मुर्दा पकड़कर लाने के लिए भेजा। अफजल खान ने शिवाजी से झूठ कहा की वो सुलह करना चाहते हैं और उनको मिलने बुलाया। और फिर गले मिलने के बहाने मारने की कोशिश की। लेकिन शिवाजी इस बात को पहले ही जानते थे। और उन्होंने अपने हाथ में बघनख रखा हुआ था। जिससे अफजल खान को मार दिया और उसकी सेना उसको मारा देख कर भाग गई। अब आप खुद सोचिये की धोखेबाज़ कौन था?

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