Banana

केले का आयुर्वेदिक महत्व, क्या है इसके फायदे?

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केला को इतिहास से पूर्व का फल माना जाता है। सिकन्दर महान ने इसकी खेती को 327 ईसा पूर्व सिन्ध दरिया में वादी में देखा था। उस समय इसका प्रयोग औषधीय गुणों के प्रयोजन की पूर्ति हेतु किया जाता था। चीन के लोग सिरदर्द, खसरा और पीलिया मंे इसको इस्तेमाल किया करते थे। आज के चिकित्साशास्त्राी भी यह अंगीकार करने लगे हैं कि यह दस्त, पेचिश और आमाशय व आंतो के कई प्रकार के रोगों में बड़ा अनूठा उपचार है।

मात्रा यही अकेला ऐसा फल है जिसको आमाशय और आंतों के घावों का रोगी बिना किसी जोखिम के खा सकने में सक्षम होता है। रोम और यूनान के चिकित्सक इसके बीजों के प्रयोग से कई तरह की बीमारियांे का इलाज करते रहे हैं। भारत के पुराने वैद्य तो बैसीलरी और एमीबिक पेचिस को केले के बीजों से दूर करते थे।

आयुर्वेद में केला

स्मरण रहे केले का फल ही नहीं पत्ते और जड़ भी रोगोपचार में बड़े काम आते हैं। पत्तों में साइट्रिक एसिड, कैल्सियम, इन्जाइम और विटामिन्स सी टेनिन की मात्रा छिपी होती है। चोट, घाव, चर्म की खुजली, ब्रोंकाइटिस ;पफेपफड़ों की वायु प्रणाली की सूजनद्ध शोथ, किडनी ;वृक्कद्ध की सूजन तथा नाक, मुँह, अमाशय के रक्तस्राव होने पर केले के रस में थोड़ी मात्रा शहद की पिलाने पर लाभ मिलता है। कटने और रक्त बहने पर केले के हरे पत्ते की पट्टी बांधने पर रक्त का निकलना बंद हो जाता है। और घाव जल्दी भर जाता है।

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विभिन्न बीमारियों का इलाज है केला

banana tree

फ़्रांस के चिकित्सक केले के पत्ते से पुरानी और नई पेचिस, अन्तड़ियांे की सूजन एन्ट्राइटिस, दस्त लगना, क्षय रोग तथा पुरानी वृक्क शोध रोग का उपचार करते है। श्री लंका में तो विषैला सांप काट जाने पर केले के तने का रस पिलाते है। यदि रोगी बेहोशी की हालत में है तो रस उसके मुंह में डालते है। केले के रस की मालिश करते और तने को कूटकर चैड़ा करके पत्तों से ढक देते है। जिससे सर्प का विष नष्ट होता और रोगी के प्राण बच जाते हैं।

अंग्रेजी भाषा मंे केला को पैराडिसिका के नाम से जाना जाता है। जो पेराडाइज का अपभ्रश है जिसका तात्पर्य स्वर्ग से होता है। यही कारण है कि हिन्दू धार्मिक अनुष्ठानों और मुसलमान मुहर्रम में ताजिए बनाते समय तना-पत्ता पफलों का समान प्रयोग करते हैं। वस्तुतः रोग से पीड़ित व्यक्ति ही नारकीय यातनाएँ झेलता और निरोग होकर स्वर्गोपम सुख का अनुभव करने लगता है।

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दमा का तेज दौरा आने पर व्यक्ति तड़पने लगता है। ऐसी स्थिति में एक पका हुआ केला लेकर गैस चूल्हे अथवा दीपक की लौ में गरम कर लें। उसके ऊपर पिसी हुई काली मिर्च छिड़ककर खाने से रोगी की व्याकुलता मिट जाती है। दो पके केले खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है। रक्तचाप की बीमारी भी दूर होती है।

इंगलिश मिडलैण्ड स्थित ऐस्टन यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकत्र्ता डा0 लुइस ने बताया है कि विकासशील देशों में केले की सब्जी पका कर खाने की परम्परा है। जो औषधीय गुणों से भरपूर है। हरे केले का प्रयोग करने से पेट का अल्सर समाप्त हो जाता है। केले के पत्तोें को जलाकर राख बनायें। 2 ग्राम राख और 2 ग्राम नमक के थोड़े से मधु के साथ लेने से कुकुर खांसी में लाभ होता है। सूखी और बलगमी खांसी के लिए भी यह एक रामबाण औषधि बनकर साबित होती है।

एस्प्रीन जैसी अंग्रेजी दवा के कुप्रभाव से गैस्ट्रिक अल्सर उत्पन्न होता है। जिसमें कच्चे केले का चूर्ण बढ़ा ही लाभकारी सिद्ध हुआ है। ब्रिटेन की ऐस्टन यूनिवर्सिटी के फार्मेसी विभाग में वर्ष 1985 के अन्तर्गत इस तरह के प्रयोग चूहों पर किये गये थे। ऐसे रोगी को कच्चे केले की सब्जी का प्रयोग बिना नमक मिर्च के करना चाहिए। चिकित्सा शास्त्रिायों का कहना है कि पाँच केला प्रतिदिन खाने से कायिक दुर्बलता मिटती है।

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यदि भोजन के साथ पके हुए दो केले खाते रहा जाय तो त्वचा सोने की तरह चमचमाने लगती है। केला खाने के पश्चात दूध में थोड़ी मात्रा मधु की मिलाकर लेने से ल्युकोरिया रोग से छुटकारा मिलता है। गले में कोई बाल अथवा नुकीली चीज पफंस जाये तो केला खाने से निकल जाती है। 6 ग्राम केले के आटे की मात्रा प्रतिदिन दूध के साथ लेने से धातु परिपुष्ट होती है। कच्चे केले का चूर्ण बनाकर उसमें समान मात्रा में गुड़ को मिलाकर लेने से स्त्रिायों को प्रदर रोग में आराम मिलता है।

मासिक धर्म (पीरियड्स) में केला खाना होता है फायदेमंद

योनि मार्ग से रक्तस्राव का क्रम रूक नहीं रहा हो तो केले की जड़ों का रस लेने से बंद हो जाता है। कभी-कभी स्त्राी योनि मार्ग से शीतल, स्वच्छ, श्वेत, गंधरहित और पीड़ा रहित जल बहने लगता है। जिस तरह पुरूषों में बहुमूत्रा रोग की शिकायत हो जाती है। उसी तरह से यह सोम रोग स्त्रिायों के कपड़े खराब करता है और गला कर मार डालता है। अति मैथुन और अति परिश्रम के कारण ऐसा हो जाता है। इसके उपचार हेतु केले की पकी कलियाँ, आँवले का स्वरस, शहद और मिश्री का सम्मिश्रण करके खाने से रोग भागता है।

मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव होने पर गाय का कच्चा दूध 100 मिली0 और 25 ग्राम केले के पत्ते का छना हुआ रस सुबह-शाम लेने से 2-3 दिन में ही रोग मिटता है। केले के हरे पत्ते का रस 5 तोला और गाय का घी सवा तोला मिलाकर लेने से रूका हुआ रक्त निकल कर बाहर आ जाता है। केले की छाल का रस 50 ग्राम कई दिन तक पीने से रूका हुआ मासिक धर्म खुलता है।

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Periods

गर्भस्राव के समय केले के काण्ड के भीतर के भाग का श्वेत ताजा रस 5 तोला और उतनी ही मात्रा मधु को मिलाकर दिन में 2-3 बार पिलाने से लाभ मिलता है। प्रसव से पीड़ित स्त्राी की कमर से केले के भीतर निकली जड़ की गांठ बांधने पर प्रसव शीघ्र होता है।

स्तनों में दूध की कमी होने पर 100 मि0ली0 केले काण्ड का रस, 6 ग्राम सपफेद जीरे का चूर्ण तथा 250 ग्राम दूध में शक्कर मिलाकर पिलायें तो तुरंत लाभ मिलेगा। केले के ऊपर की बांझ की फलियाँ प्रायः गिर जाती है। 5-7 की संख्या में लेकर शिवलिंगी के 5-7 बीजों के साथ मासिक धर्म के तीसरे दिन खिलाने से बांझपन की शिकायत नहीं रहती। बहुमूत्रा के रोगी को पका केला के साथ बिदारीकन्द चूर्ण 2 ग्राम, शतावरी चूर्ण लेकर ऊपर से दूध पी लेने से रोग नहीं रहता।

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मधुमेह ;डाइबिटीजद्ध के रोगी को केले में आधा मिली ग्राम नाग भस्म मिला कर सेवन करने से रोगमुक्ति का लाभ मिलता है। अधिक मोटापा भी बीमारी है इससे बचने के लिए केले के तने के 100 मिली रस में 1 नींबू तथा 10 ग्राम मधु की मात्रा मिला कर प्रतिदिन पीना चाहिए। ठण्डे मौसम में रस को गर्म करके भी पीया जा सकता है। बिना मांस और सूखे शरीर वालों को तो प्रतिदिन पका केला लेकर ऊपर से दूध पीते रहना चाहिए। यक्ष्मा, तपेदिक, टीबी आदि क्षय रोग है। केले के पेड़ का ताजा रस अथवा सब्जी तथा कच्चा केला तो इसमंे रामबाण की तरह सपफलता प्राप्ति कर दिखाता है।

जब प्राण वायु और उदानवायु कुपित होकर बार-बार ऊपर नीचे होने लगती है तो व्यक्ति को हिचकियाँ आने लगती है। जंगली केलों की काली राख को मधु के साथ दिन में तीन-चार बार लेने से हिचकी बंद हो जाती है। पके केले के गूदे को नींबू के रस मंे पीसकर मरहम की भांति लगाने से दाद, खाज, खुजली, एक्जीमा तथा सिर का गंजापन दूर होता है। आग से जलने पर केले के गूदे को पफेंटकर कपड़े के टुकड़े पर मरहम की तरह लगाने से ठण्डक लगती है। केले के छिलके को बाँध देने से सूजन पटक जाती है। केले के पत्ते को पीसकर उसमें नींबू मिलाकर पतला लेप लगाने से खुजली बंद हो जाती है।

जीभ के छाले की शिकायत होने पर केला का प्रयोग गाय की दही के साथ प्रातःकाल प्रयोग करें। केला और शहद मिला कर बच्चे को खिला दिया जाये तो मिट्टी खाने की आदत छूट जाती है। दुखती हुई आँखों पर केले का हरा पत्ता लगाने से दुखना बन्द हो जाती है। केले के नर्म पत्तों पर अरण्ड का तेल चुपड़ कर लगाने से पानी अथवा दुग्ध से जले छाले जल्दी ठीक हो जाते है। 50 ग्राम साबुत मूँग को आधा लीटर पानी में पकालें। उसमें 100 ग्राम केले के ताजा पफूल डालें उसके पक जाने पर सप्ताह तक प्रयोग करने से पित्त शान्त होता है। केले का शर्बत खांसी को मिटाता है।

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पेचिस की बीमारी लगने पर पके केले को दही के साथ सेवन करें तो आराम मिलता है। यदि पेचिश के साथ मरोड़ भी महसूस होने लगे तो पके केले का गूदा 50 ग्राम, पकी इमली का गूदा 15 ग्राम, सेंधा नमक 6 ग्राम मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है। अतिसार व संगहणी रोग में कच्चे केलों को उबालकर छील लें पिफर दो-चार लोंग का छोंक देकर उन्हें संेधा नमक, काली मिर्च हल्दी, धनियां के साथ पकाकर रसदार शाक की तरह प्रयोग करने से रोग नहीं रहता। पेट में कीड़ों की शिकायत होने पर कच्चे केले की सब्जी भोजन के साथ प्रयोग करने पर कृमि मरकर मलद्वार से बाहर निकल जाते है।

जो केले के पत्ते पेड़ पर ही पीले हो गये हो उनको सरसों के तेल मंे जलाकर उस तेल में मुर्दासंग का चूर्ण मिलाकर लेप करने से श्वेत कुष्ठ मंे लाभ मिलता है। केले के पत्तों पर ओस कणों को प्रातःकाल नेत्रों पर छिटकने से कुछ ही दिनों में चश्मा उतर जाता है और नेत्रा ज्योति बढ़ जाती है। केले के तने के ताजा रस को निकालकर सांप काटे मनुष्य या पशु को तुरन्त पिलाने से लाभ मिलता है। जब किसी को पागल कुत्ता काट खाये तो केले की जड़ का रस 50 मि0ली0 की मात्रा में प्रतिदिन 1 माह तक पिलाते रहने से विष का कुप्रभाव मिटता है।

चूहे के काटने पर केले के तने का रस 25 मि0ली0 एक सप्ताह तक सुबह-शाम पिलाने से विष नहीं चढ़ता। बर्र-बिच्छू के डंकर मारने पर केले की जड़ को पीसकर लगाने से पीड़ा मिटती है। कच्चे केले का आटा गेहूँ-चने के आटे में मिलाकर सेवन करने से मंदाग्नि का रोग दूर होता है।

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आयुर्वेदाचार्य सुश्रुत के मतानुसार केले का प्रयोग दूध के साथ अधिक स्वास्थ्यवर्धक है। बागभट्ट का भी यही अभिमत है। आधुनिक चिकित्सा जगत भी इस तथ्य को स्वीकार कर चुका है। केले का प्रयोग किसी भी प्रकार करने के पश्चात नमक, शहद, सोंठ, अदरक का इस्तेमाल अवश्य करें। इसके ऊपर इलायची खाना भी उचित रहता है। इस प्रकार देखते है कि केला अकेला ही इतना अलबेला पफल है जो व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य संवर्धन का लाभ पहुंचाता है।

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