पत्रकारिता की कसौटी की भी कसौटी होनी चाहिए

पत्रकारिता का अस्तित्व ही सवाल पूछने और शासन में बैठे लोगों की जवाबदेही तय करना है। लेकिन इस जवाबदेही से मीडिया भी अछूती नहीं। अब

अब इससे अधिक जंगलीपना और क्या होगा!

अपने समाज में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और बलात्कार जैसी घटनाओं की चर्चा सभी करना चाहते हैं लेकिन उसके कारणों की नहीं। इन बलात्कारियों की